ABOUT

प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह काव्या संगीत और शिक्षा के क्षेत्र में सुपरिचित नाम है। संगीत प्रेमी चंद्र किशोर सिंह और श्यामा सिंह की प्रथम संतान के रूप में डॉ. काव्या का जन्म छपरा (बिहार ) में हुआ। चार भाई -बहनो में सबसे बड़ी डॉ काव्या का पूरा परिवार संगीतमय है जिस कारण सगीत में रुचि होना बहुत स्वाभाविक था। तीन वर्ष की अवस्था में ही सगीत की शिक्षा इनकी माता जी श्रीमती श्यामा सिंह द्वारा आरम्भ हो गई थी। लगभग छः वर्ष की उम्र से स्थानीय पं आदित्यनाथ झा (पचगछिया -घराना के विद्वान ) द्वारा गायन की विधिवत शिक्षा लगभग 16 वर्षो तक चली और उनके निर्देशन में शिक्षा ग्रहण करते हुए ही संगीत (गायन ) की सगीत प्रवीण तक की उपाधि प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से प्राप्त की। संगीत (प्रतिष्ठा ) के साथ स्नातक और गायन, संस्कृत और नाटय विषयो से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त डॉ. सिंह ने जे आर एफ (यूजीसी ) में चयन के बाद काशी हिन्दू विश्वविधायल, वाराणसी के गायन विभाग से प्रो. प्रदीप कुमार दीक्षित 'नेहरंग' के निर्देशन में पीएच डी की उपाधि हेतु शोध -कार्य किया। साथ ही , इसी वर्ष (1991 ) से बनारस घराना के विद्धतद्धय विदुषी गायिका 'पदमविभूषण ' श्रीमती गिरजा देवी से दूसरी और पं जालपा प्रसाद मिश्र से ख्याल गायन की शिक्षा आरम्भ हुई जो वर्ष 1965 तक निरन्तर चलती रही। वर्ष 1996 में इनका चयन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विश्वविद्यालय संगीत एवं नाटय विभाग में संगीत की व्याख्याता के रूप में हुआ। वर्तमान में डॉ. सिंह प्रोफेसर सह संकायाध्यक्ष, ललित्त कला संकाय है। संगीत की साधना और अध्धयन -अध्यापन के साथ निरन्तर शोधरत रहनेवाली डॉ काव्या ने वर्ष 2008 में प्रो. प्रदीप कुमार दीक्षित के निर्देशन में ही ललित नारायण मिथिला विश्वविधालय , दरभंगा से दरभंगा से संगीत में डी लिट् की उपाधि प्राप्त की। डॉ. सिंह ने अधतन 8 बहुमूल्य पुस्तकों का लेखन और 4 पुस्तकों का सम्पादन भी किया है। शोध पत्रिका 'स्तोम ' (ISSN -2231 -1041 ) की प्रधान संपादक भी है। विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में लगभग 100 से अधिक शोध-आलेख प्रकाशित हो चुके हैं तो इतनी ही संगोष्ठियों (राष्ट्रिय -अंतराष्ट्रीय ) में पत्र -वाचक, बीच वक्तव्य तथा अध्यक्षता भी कर चुकी हैं। मैथिली पुस्तक "बिछल कथा " का हिन्दी अनुवाद (हरि मोहन झा की श्रेष्ठ कथाएँ) भी किया हैं जिसके लिए आपको साहित्य अकादमी, दिल्ली द्वारा अनुदान प्राप्त हुआ। विश्वविधालय अनुदान आयोग द्वारा प्राप्त अनुदान द्वारा प्रोजेक्ट -वर्क भी किया। डॉ. काव्या ने देश के विभिन्न शहरो में गायन प्रस्तुत किया हैं। शास्त्रीय और उपशास्त्रीय शैली की कुशल गायिका ने असंख्य ऑनलाइन सत्रों में महत्वपूर्ण सोदाहरण -व्याख्यान दिया हैं। कुशल शिक्षिका के रूप में भी आपको ख्याति हैं, छात्र -छात्राए आपके मार्गदर्शन हेतु लालायित रहते हैं। अनगिनत विद्यार्थीयो को पि एच डी एवं डी. लिट् उपाधि हेतु शोध-निर्देशन-कार्य किया हैं और कर रही हैं।

    पुस्तक के नाम -
  • पं ओंकार नाथ जी ठाकुर एवं उनकी शिष्य -परम्परा
  • संगीत संजीवनी
  • संगीत सुधा
  • लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल
  • ज्योतिरिशवरकृत वर्ण रत्नाकर में संगीत
  • संगीत सुरभि
  • संगीत सम्प्रति (सम्पादन)
  • भारतीय संगीतज्ञ (सम्पादन )
  • भारतीय संगीत ग्रन्थ
  • संगीत सुनिधि (सम्पादन )
  • नाट्य निधि (सम्पादन )
  • भार्गव
  • हरिमोहन झा की श्रेष्ठ कथाएँ (अनुवाद )
  • डॉ. काव्या को उनके उल्लेखनीय योगदान हेतु अनेक सम्मान भी प्राप्त हुए हैं ---
  • -विजय रोहतगी विजय चलचिन्ह, 1986
  • -अमृत महोत्सव सम्मान, संस्कार भारती, 2000
  • - अनिल कुमार मुखर्जी शिखर सम्मान, 2001
  • -साहित्यकार सम्मान, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, 2004
  • - सारण स्वाभिमान सम्मान, बिहार शताब्दी वर्ष, 2012
  • -सुशीला भर्गव स्मृति सम्मान, कृति कला संस्थान, आगरा, 2014
  • - संगीत मनीषी सम्मान, सम, दिल्ली , 2016
  • -राम दयाल धनोप्या सम्मान, जबलपुर, 2019
  • -बिहार हिन्दी साहित्य सम्मलेन शताव्दी सम्मान, पटना , 2019
  • -बेस्ट टीचर अवार्ड, ल ना मिथिला विश्व विधालय , दरभंगा, 2020
  • - कला मणि सम्मान, आरा, 2020
  • -पं घनारंग प्रकाश सम्मान, 2020 -21